सामान्य अध्ययन-भूगोल, विज्ञान, इतिहास, कला और संस्कृति : painting

सामान्य अध्ययन- भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति, विज्ञान, भूगोल, राजनीति शास्त्र

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Tuesday, July 23, 2019

भारतीय चित्रकला का विकास

July 23, 2019 0

मानव सभ्यता के आरम्भ से ही चित्र मनुष्य की भावाभिव्यक्ति के साधन रहे हैं। वस्तुतः भाषा और लिपि के आविष्कार से भी पहले मनुष्य ने आत्माभिव्यक्ति के लिए चित्रकारी को अपनाया। आदिमकालीन गुफाओं से मिले रेखाचित्र इसके प्रमाण हैं। भीमबेतका और होशंगाबाद की गुफाओं से मिले चित्रों से स्पष्ट है कि भारत में भी चित्रकला का विकास प्रागैतिहासिक काल के दौरान ही हुआ।
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Thursday, June 4, 2015

प्राचीन भारतीय चित्रकला के षडांग

June 04, 2015 0
मानव सभ्यता के आरम्भ से ही चित्र मनुष्य की भावाभिव्यक्ति के साधन रहे हैं . वस्तुतः भाषा और लिपि के आविष्कार से भी पहले मनुष्य ने आत्माभिव्यक्ति के लिए चित्रकारी को अपनाया . आदिमकालीन गुफाओं से मिले रेखाचित्र इसके प्रमाण हैं . भीमबेतका और होशंगाबाद की गुफाओं से मिले चित्रों से स्पष्ट है कि भारत में भी चित्रकला का विकास प्रागैतिहासिक काल के दौरान ही हुआ . हड़प्पा सभ्यता से शुंग काल के मध्य चित्रकारी के पुरातात्विक साक्ष्य तो प्राप्य नहीं हैं ,लेकिन वैदिक साहित्य और उनके बाद बौद्ध ग्रंथों में भी चित्रकला की चर्चा इस बात का प्रमाण है कि उस काल के लोग चित्रकला से अनजान नहीं थे .
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Tuesday, June 2, 2015

रंग रसिया : राजा रवि वर्मा

June 02, 2015 0
राजा रवि वर्मा द्वारा चित्रित भीष्म प्रतिज्ञा 

केतन मेहता निर्देशित ‘रंग रसिया ‘ फिल्म ने वक्त की धूल-गर्द में दबे राजा रवि वर्मा के नाम को धो पोंछ कर फिर से जनमानस के सामने रख दिया .राजा रवि वर्मा के नाम से अपरिचित लोग भी उनके बारे में जिज्ञासा प्रकट करते देखे गए . वैसे , यह एक दुखद आश्चर्य है कि आधुनिक भारतीय चित्रकला के शलाका पुरुष राजा रवि वर्मा  का नाम यह देश सौ –डेढ़ सौ सालों तक भी याद नहीं रख सका .
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Wednesday, December 10, 2014

प्राचीन भारतीय चित्रकला : भीमबेटका के शैल चित्र

December 10, 2014 0

भारतीय चित्रकला के आरंभिक साक्ष्य प्रागैतिहासिक काल से ही प्राप्त होने लगते हैं . होशंगाबाद और भीमबेटका (भोपाल से 40 किमी दक्षिण )  के गुफा चित्र प्राचीन भारतीय शैल चित्रकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं . पुरातत्वविदों के अनुसार भीमबेटका की गुफाओं से प्राप्त कुछ चित्र लगभग 30000 वर्ष पुराने हैं .समय विस्तार की दृष्टि से देखें तो ये चित्र पुरा पाषाणकाल से लेकर आरंभिक मध्यकाल तक के हैं .भीमबेटका की लगभग 500 गुफाओं में शैल चित्र प्राप्त हुए हैं. ये चित्र न सिर्फ गुफाओं की दीवारों पर उकेरे गए हैं , बल्कि उनकी ऊंची छतों पर भी उत्कीर्ण हैं . चित्रों में ज़्यादातर श्वेत और लाल रंगों का प्रयोग मिलता है . कहीं कहीं हरे और पीले रंगों का प्रयोग भी दिखता है . रंगों को बनाने के लिए संभवतः मैंगनीज़ , हैमेटाईट , लाल पत्थर , लकड़ी का कोयले  , हरी पत्तियों और पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता था .
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